गंगा दशहरा का महत्व और इसे कैसे मनाया जाता है
गंगा दशहरा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जो माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण (धरती पर आगमन) […]
गंगा दशहरा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जो माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण (धरती पर आगमन) […]
भाग 7 – काशी का रक्षक मंडल : कालभैरव, अष्टभैरव और 56 विनायकों का रहस्य कपिलधारा की शांति और मणिकर्णिका की पूर्णाहुति के बाद भी काशी की कथा समाप्त नहीं होती। क्योंकि काशी केवल मंदिरों का
भाग 6 – कपिलधारा और जौं विनायक : पंचक्रोशी की पूर्णाहुति और मोक्ष का मौन– शिवपुर पीछे छूट चुका होता है। अब यात्रा का स्वर बदल जाता है। शरीर अत्यंत थका हुआ
भाग 5 – शिवपुर / पांचो पांडवा मंडल : धर्म, तप और महाभारत की स्मृति रामेश्वर की करुणा पीछे छूट रही होती है। अब यात्रा का मार्ग फिर
भाग 4 – रामेश्वर मंडल : जहाँ राम ने शिव को प्रणाम किया भीमचंडी की शक्ति पीछे छूट चुकी होती है। देवी की उग्रता, घंटियों
भाग 3 – भीमचंडी मंडल : काशी की रक्षिका और शक्ति का द्वार कर्दमेश्वर की शांति पीछे छूट चुकी होती है। अब मार्ग बदलने लगता है। सूर्य ऊपर चढ़
भाग 2 – कर्दमेश्वर मंडल : पंचक्रोशी का प्रथम द्वार रात्रि का अंतिम अंधकार धीरे-धीरे पीछे छूट रहा होता है। काशी की गलियाँ, आरती की स्मृति और मणिकर्णिका का धुआँ मानो
भाग 1 मणिकर्णिका से विश्वनाथ तक: पंचक्रोशी संकल्प का दिव्य आरंभ– काशी की पंचक्रोशी यात्रा लगभग 25 कोस / 88 किमी की पवित्र परिक्रमा मानी जाती है, जिसमें 108 देवस्थल जुड़े बताए जाते हैं। इसके पाँच
काशी की पंचक्रोशी यात्रा में केवल पाँच पड़ाव ही नहीं, बल्कि 108 से अधिक देवस्थल, 56 विनायक, भैरव, देवी-तीर्थ, कुंड और शिवलिंगों का एक विशाल आध्यात्मिक मंडल समाहित माना जाता है।
काशी की “पाँच कोश यात्रा” से सामान्यतः आशय पंचकोशी / पंचक्रोशी यात्रा से होता है यह काशी की दिव्य परिक्रमा है, जो लगभग 25 कोस (80–90 किमी) में फैली हुई है और पाँच