Pilgrims walking toward the historic Shri Kaal Bhairav Mandir temple courtyard in Varanasi.
पुरुषोत्तम मास

काशी का रक्षक मंडल क्या है? जानिए कालभैरव, अष्टभैरव और 56 विनायकों का महत्व

भाग 7 – काशी का रक्षक मंडल : कालभैरव, अष्टभैरव और 56 विनायकों का रहस्य  कपिलधारा की शांति और मणिकर्णिका की पूर्णाहुति के बाद भी काशी की कथा समाप्त नहीं होती। क्योंकि काशी केवल मंदिरों का

Pilgrims offering prayers at Kapildhara Vinayak temple ghat during the Panchkoshi Yatra in Varanasi.
पुरुषोत्तम मास

कपिलधारा और जौं विनायक को पंचक्रोशी यात्रा का अंतिम पड़ाव क्यों माना जाता है?

भाग 6 – कपिलधारा और जौं विनायक : पंचक्रोशी की पूर्णाहुति और मोक्ष का मौन–  शिवपुर पीछे छूट चुका होता है। अब यात्रा का स्वर बदल जाता है। शरीर अत्यंत थका हुआ

Pilgrims walking along the narrow street past the Panch Pandava Temple on the Panchkoshi route in Varanasi.
पुरुषोत्तम मास

शिवपुर / पांचो पांडवा मंडल क्या है? जानिए पंचक्रोशी यात्रा में पांडव शिवलिंग और द्रौपदी कुंड का महत्व

भाग 5 – शिवपुर / पांचो पांडवा मंडल : धर्म, तप और महाभारत की स्मृति  रामेश्वर की करुणा पीछे छूट रही होती है। अब यात्रा का मार्ग फिर

Rameshwar Mahadev Temple complex with pilgrims, sacred water tank, and a banyan tree along the Ganges in Varanasi.
पुरुषोत्तम मास

रामेश्वर मंडल: काशी पंचक्रोशी यात्रा में जहाँ राम ने शिव को प्रणाम किया

भाग 4 – रामेश्वर मंडल : जहाँ राम ने शिव को प्रणाम किया  भीमचंडी की शक्ति पीछे छूट चुकी होती है। देवी की उग्रता, घंटियों

Illustrated map of Bheemchandi temple stop on the Panchkoshi Yatra pilgrimage route in Varanasi.
पुरुषोत्तम मास

काशी पंचक्रोशी यात्रा का दूसरा पड़ाव भीमचंडी क्यों है? जानिए शक्ति और संरक्षण का रहस्य

भाग 3 – भीमचंडी मंडल : काशी की रक्षिका और शक्ति का द्वार  कर्दमेश्वर की शांति पीछे छूट चुकी होती है। अब मार्ग बदलने लगता है। सूर्य ऊपर चढ़

The historic stone spire of Kardameshwar Mahadev Temple, the first night stop on the Panchkoshi Yatra in Varanasi.
पुरुषोत्तम मास

कर्दमेश्वर को पंचक्रोशी यात्रा का पहला आध्यात्मिक द्वार क्यों कहा जाता है?

भाग 2 – कर्दमेश्वर मंडल : पंचक्रोशी का प्रथम द्वार  रात्रि का अंतिम अंधकार धीरे-धीरे पीछे छूट रहा होता है। काशी की गलियाँ, आरती की स्मृति और मणिकर्णिका का धुआँ मानो

Pilgrims circumambulating the sacred Manikarnika Kund during the Panchkoshi Yatra pilgrimage in Varanasi.
पुरुषोत्तम मास

काशी पंचक्रोशी यात्रा मणिकर्णिका से क्यों शुरू होती है और कालभैरव की अनुमति क्यों ली जाती है

भाग 1  मणिकर्णिका से विश्वनाथ तक: पंचक्रोशी संकल्प का दिव्य आरंभ–  काशी की पंचक्रोशी यात्रा लगभग 25 कोस / 88 किमी की पवित्र परिक्रमा मानी जाती है, जिसमें 108 देवस्थल जुड़े बताए जाते हैं। इसके पाँच

Pilgrims on the Panchkoshi Yatra parikrama route walking past ancient Shiva temples along the Ganges River in Varanasi.
पुरुषोत्तम मास

काशी पंचक्रोशी यात्रा के प्रमुख मंदिर, विनायक और आध्यात्मिक मंडल

 काशी की पंचक्रोशी यात्रा में केवल पाँच पड़ाव ही नहीं, बल्कि 108 से अधिक देवस्थल, 56 विनायक, भैरव, देवी-तीर्थ, कुंड और शिवलिंगों का एक विशाल आध्यात्मिक मंडल समाहित माना जाता है।  

Golden spire of Kashi Vishwanath Temple overlooking boats on Varanasi Ganga ghats at sunset
पुरुषोत्तम मास

जब काशी बुलाती है: पंचक्रोशी यात्रा कैसे बदल देती है मन, आत्मा और जीवन

काशी की “पाँच कोश यात्रा” से सामान्यतः आशय पंचकोशी / पंचक्रोशी यात्रा से होता है यह काशी की दिव्य परिक्रमा है, जो लगभग 25 कोस (80–90 किमी) में फैली हुई है और पाँच

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