“पैर बाहर चलते हैं, लेकिन यात्रा भीतर होती है…” काशी पंचकोशी यात्रा का अद्भुत रहस्य
पुरुषोत्तम मास में केवल व्रत और पूजा ही नहीं, बल्कि “पंचकोश यात्रा” और पंचकोशी/परिक्रमा यात्राओं का भी विशेष महत्व माना गया है विशेषकर काशी में। यहाँ एक सुंदर […]
पुरुषोत्तम मास में केवल व्रत और पूजा ही नहीं, बल्कि “पंचकोश यात्रा” और पंचकोशी/परिक्रमा यात्राओं का भी विशेष महत्व माना गया है विशेषकर काशी में। यहाँ एक सुंदर […]
बाहरी उपवास से भी आगे, आत्मा की यात्रा पुरुषोत्तम महीना केवल पंचांग में जुड़ा एक अतिरिक्त मास नहीं है यह मनुष्य के भीतर छिपे हुए पंचकोशों को समझने और शुद्ध
पुरुषोत्तम महीना (अधिक मास): जब समय को भी ईश्वर की शरण में जाना पड़ा समय केवल घड़ी की सुइयों में नहीं चलता कभी-कभी समय स्वयं भी ठहरकर ईश्वर की ओर देखता है। सनातन
दोस्तों हम लोग बारह ज्योतिर्लिंग के मानसिक यात्रा पर निकल पड़े है। तो आज का हमारा पड़ाव है हिमालय के
दोस्तों सावन का महीना चल रहा है । ऐसे में इस पावन महीने में क्यों ना हम देवों के देव
प्रथम कांवड़िया रावण और बैद्यनाथ धाम कथा दोस्तों, सावन का पावन महीना चल रहा है और ऐसे में कांवड़ की
इसके पहले हम जान चुके हैं कि सावन क्यों इतना पावन है । इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए आज
“सावन क्यों है पावनसावन क्यों है पावन, पूछो ये मन से,विष पीकर शिव ने बचाया था जग को,जल चढ़े शिवलिंग
मायोंग की अदृश्य विद्या: भारत का छुपा हुआ ‘ब्लैक मैजिक कैपिटल’ मायोंग का रहस्य, जहाँ तंत्र की छाया,अघोरी-नागा की अदृश्य
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥” अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु