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Tag: शिव भक्ति

कपिलधारा और जौं विनायक को पंचक्रोशी यात्रा का अंतिम पड़ाव क्यों माना जाता है?

भाग 6 – कपिलधारा और जौं विनायक : पंचक्रोशी की पूर्णाहुति और मोक्ष का मौन–  शिवपुर पीछे छूट चुका होता है। अब यात्रा का स्वर बदल जाता है। शरीर अत्यंत थका हुआ होता है। पैरों में छाले पड़…

शिवपुर / पांचो पांडवा मंडल क्या है? जानिए पंचक्रोशी यात्रा में पांडव शिवलिंग और द्रौपदी कुंड का महत्व

भाग 5 – शिवपुर / पांचो पांडवा मंडल : धर्म, तप और महाभारत की स्मृति  रामेश्वर की करुणा पीछे छूट रही होती है। अब यात्रा का मार्ग फिर बदलता है। सूर्य पश्चिम की ओर…

रामेश्वर मंडल: काशी पंचक्रोशी यात्रा में जहाँ राम ने शिव को प्रणाम किया

भाग 4 – रामेश्वर मंडल : जहाँ राम ने शिव को प्रणाम किया  भीमचंडी की शक्ति पीछे छूट चुकी होती है। देवी की उग्रता, घंटियों की गूँज और शक्ति का…

कर्दमेश्वर को पंचक्रोशी यात्रा का पहला आध्यात्मिक द्वार क्यों कहा जाता है?

भाग 2 – कर्दमेश्वर मंडल : पंचक्रोशी का प्रथम द्वार  रात्रि का अंतिम अंधकार धीरे-धीरे पीछे छूट रहा होता है। काशी की गलियाँ, आरती की स्मृति और मणिकर्णिका का धुआँ मानो अब भी यात्री के वस्त्रों…

“पैर बाहर चलते हैं, लेकिन यात्रा भीतर होती है…” काशी पंचकोशी यात्रा का अद्भुत रहस्य

पुरुषोत्तम मास में केवल व्रत और पूजा ही नहीं, बल्कि “पंचकोश यात्रा” और पंचकोशी/परिक्रमा यात्राओं का भी विशेष महत्व माना गया है विशेषकर काशी में। यहाँ एक सुंदर बात समझनी चाहिए “पंचकोश” (आंतरिक पाँच…