नीलांचल की गोद में विराजे जो धाम,जहाँ स्वयं ब्रह्मा भी झुके, ले तेरा नाम।न मंदिर में मूर्ति, न आँखों का खेल,यहाँ तांत्रिक साधना बनती है…
नीलांचल की गोद में विराजे जो धाम,जहाँ स्वयं ब्रह्मा भी झुके, ले तेरा नाम।न मंदिर में मूर्ति, न आँखों का खेल,यहाँ तांत्रिक साधना बनती है…