भाग 6 – कपिलधारा और जौं विनायक : पंचक्रोशी की पूर्णाहुति और मोक्ष का मौन– शिवपुर पीछे छूट चुका होता है। अब यात्रा का स्वर बदल जाता है। शरीर अत्यंत थका हुआ होता है। पैरों में छाले पड़…
On a journey to find our spirtual soul
भाग 6 – कपिलधारा और जौं विनायक : पंचक्रोशी की पूर्णाहुति और मोक्ष का मौन– शिवपुर पीछे छूट चुका होता है। अब यात्रा का स्वर बदल जाता है। शरीर अत्यंत थका हुआ होता है। पैरों में छाले पड़…
भाग 5 – शिवपुर / पांचो पांडवा मंडल : धर्म, तप और महाभारत की स्मृति रामेश्वर की करुणा पीछे छूट रही होती है। अब यात्रा का मार्ग फिर बदलता है। सूर्य पश्चिम की ओर…
भाग 4 – रामेश्वर मंडल : जहाँ राम ने शिव को प्रणाम किया भीमचंडी की शक्ति पीछे छूट चुकी होती है। देवी की उग्रता, घंटियों की गूँज और शक्ति का…
भाग 3 – भीमचंडी मंडल : काशी की रक्षिका और शक्ति का द्वार कर्दमेश्वर की शांति पीछे छूट चुकी होती है। अब मार्ग बदलने लगता है। सूर्य ऊपर चढ़ आता है। धूल भरे पथ, खेतों के…
भाग 2 – कर्दमेश्वर मंडल : पंचक्रोशी का प्रथम द्वार रात्रि का अंतिम अंधकार धीरे-धीरे पीछे छूट रहा होता है। काशी की गलियाँ, आरती की स्मृति और मणिकर्णिका का धुआँ मानो अब भी यात्री के वस्त्रों…
भाग 1 मणिकर्णिका से विश्वनाथ तक: पंचक्रोशी संकल्प का दिव्य आरंभ– काशी की पंचक्रोशी यात्रा लगभग 25 कोस / 88 किमी की पवित्र परिक्रमा मानी जाती है, जिसमें 108 देवस्थल जुड़े बताए जाते हैं। इसके पाँच मुख्य पड़ाव हैं-कर्दमेश्वर, भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर और कपिलधारा। 1. मणिकर्णिका कुंड – जहाँ संकल्प जन्म लेता है …
काशी की पंचक्रोशी यात्रा में केवल पाँच पड़ाव ही नहीं, बल्कि 108 से अधिक देवस्थल, 56 विनायक, भैरव, देवी-तीर्थ, कुंड और शिवलिंगों का एक विशाल आध्यात्मिक मंडल समाहित माना जाता है। काशी पंचक्रोशी यात्रा 108 मंदिर और दिव्य मंडल भाग 1…
काशी की “पाँच कोश यात्रा” से सामान्यतः आशय पंचकोशी / पंचक्रोशी यात्रा से होता है यह काशी की दिव्य परिक्रमा है, जो लगभग 25 कोस (80–90 किमी) में फैली हुई है और पाँच मुख्य पड़ावों तथा असंख्य देवस्थलों को जोड़ती…
पुरुषोत्तम मास में केवल व्रत और पूजा ही नहीं, बल्कि “पंचकोश यात्रा” और पंचकोशी/परिक्रमा यात्राओं का भी विशेष महत्व माना गया है विशेषकर काशी में। यहाँ एक सुंदर बात समझनी चाहिए “पंचकोश” (आंतरिक पाँच…