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Tag: आनंदमय कोश

कपिलधारा और जौं विनायक को पंचक्रोशी यात्रा का अंतिम पड़ाव क्यों माना जाता है?

भाग 6 – कपिलधारा और जौं विनायक : पंचक्रोशी की पूर्णाहुति और मोक्ष का मौन–  शिवपुर पीछे छूट चुका होता है। अब यात्रा का स्वर बदल जाता है। शरीर अत्यंत थका हुआ होता है। पैरों में छाले पड़…

“पुरुषोत्तम महीना और पंचकोश का रहस्य” 

बाहरी उपवास से भी आगे, आत्मा की यात्रा  पुरुषोत्तम महीना केवल पंचांग में जुड़ा एक अतिरिक्त मास नहीं है यह मनुष्य के भीतर छिपे हुए पंचकोशों को समझने और शुद्ध करने का भी अवसर माना…